April 14, 2026

कच्चे तेल की कीमतों से तेल कंपनियाें पर बढ़ा दबाव, बढ़ सकती हैं पेट्रोल डीजल की कीमतें

कच्चे तेल की कीमतों से तेल कंपनियाें पर...

नई दिल्ली, 14 अप्रैल : कच्चे माल की लागत में भारी वृद्धि के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। इसके चलते कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कीमतों को एक दशक पहले डीरेगुलेट (नियंत्रण-मुक्त) किए जाने के बावजूद, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।

वैश्विक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव

इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचीं। इस साल की शुरुआत में करीब 70 डॉलर तक गिरावट आई। हाल ही में अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद कीमतें फिर बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

रोजाना हजारों करोड़ का नुकसान

सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने तीनों कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही थीं। सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद यह नुकसान घटकर करीब 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दिया गया, बल्कि इसे कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया गया। मार्च महीने में हुए भारी नुकसान ने जनवरी-फरवरी की कमाई को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि तेल कंपनियां जनवरी-मार्च तिमाही में घाटा दर्ज कर सकती हैं।

रिपोर्ट में सामने आई अहम जानकारी

मैक्वेरी ग्रुप की ‘इंडिया फ्यूल रिटेल’ रिपोर्ट के अनुसार 135–165 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से कंपनियों का नुकसान लगभग 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाता है।

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