तेहरान, 14 अप्रैल : ईरानी समाचार पत्रों और सोशल मीडिया विश्लेषकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी का खुलकर मज़ाक उड़ाया है। उनका कहना है कि अमेरिका पहले भी युद्ध के मैदान में असफल रहा है और इस बार भी उसकी रणनीति कारगर नहीं होगी। बढ़ते तनाव के बीच 8 अप्रैल को अस्थायी युद्धविराम हुआ। दोनों पक्षों ने Islamabad में बातचीत पर सहमति जताई, लेकिन इस वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
संघर्ष के बाद ईरान ने खुद को इस टकराव का विजेता बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत दिखाने और घरेलू समर्थन जुटाने की कोशिश का हिस्सा है।
ट्रुथ सोशल पर नाकाबंदी की घोषणा
2 अप्रैल को Donald Trump ने अपने प्लेटफॉर्म Truth Social पर घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाज़ों की नाकाबंदी करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में अन्य देशों की भागीदारी भी संभव है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह नाकाबंदी 13 अप्रैल को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से लागू होनी थी।
यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया। बताया गया है कि इस नाकाबंदी का मुख्य लक्ष्य ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाज़ हैं। हालांकि, अन्य देशों के बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाज़ों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। ईरानी मीडिया ने इस धमकी को हल्के में लेते हुए कहा कि अमेरिका ऐसे जलमार्ग को ‘और बंद’ करने की बात कर रहा है, जिसे ईरान पहले से ही काफी हद तक नियंत्रित कर चुका है।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर भी सवाल
ईरानी अख़बारों ने ट्रंप की इस धमकी को मज़ाक में कहा कि वह सिर्फ़ उस जलमार्ग को ‘और ज़्यादा बंद’ कर रहे हैं, जिसे ईरान युद्ध के बाद से पहले ही काफ़ी कुछ बंद कर चुका। अख़बारों ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के यूरोपीय और एशियाई सहयोगी इस मुद्दे पर सक्रिय कदम उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे संकेत मिलता है कि इस नाकाबंदी को लेकर वैश्विक स्तर पर एकमत समर्थन नहीं है। उसके मुताबिक ट्रंप का यह क़दम असल में ‘पूरी दुनिया से युद्ध’ जैसा है.

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